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ये दुनिया है जैसे कोई जादू का खिलौना जो पास है वो मिट्टी है जो नहीं मिला वो सोना 👂👂

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यदि सबकुछ पहले से तय है और वैसा ही है जैसा हमने सोच लिया है और इस पर विश्वास कर लिया जाएं तो कर्म करने का साहस व परिवर्तन की अपेक्षा दोनों ही मात्र भ्रम प्रतीत होगा।।

कबीर

कबीर, एक राम दशरथ का बेटा, एक राम घट घट में बैठाएक राम का सकल पसारा,एक राम त्रिभुवन से न्यारा . तीन राम को सब कोई धयावे, चतुर्थ राम को मर्म न पावे। चौथा छाड़ि जो पंचम धयावे, कहे कबीर सो हम को पावे माला फिरूं न कर फिरूं, जिभ्या कहे न राम। सुमिरण मेरा… Continue reading कबीर

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स्वयम् द्वारा अर्जित हर्ष ही स्थायी सुख देता है क्रृतज्ञता से अर्जित भाव में स्थायित्व नहीं होता।।

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ख्यालों के तरकश से हसरतों के तीर चलाऐ कमबख्त तीर भी गया और निशाना भी।।