रामनरेश त्रिपाठी

अन्वेषण मैं ढूँढता तुझे था, जब कुंज और वन में। तू खोजता मुझे था, तब दीन के सदन में॥ तू ‘आह’ बन किसी की, मुझको पुकारता था। मैं था तुझे बुलाता, संगीत में भजन में॥ मेरे लिए खड़ा था, दुखियों के द्वार पर तू। मैं बाट जोहता था, तेरी किसी चमन में॥ बनकर किसी के… Continue reading रामनरेश त्रिपाठी

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कितना शोर है ना आस पास मेरे शिकवे शिकायतों और उम्मीदों का मजमा सा फैला है आस पास मेरे मेरे दिल के कोने में अरमान का एक कतरा खौफ के मारे दुबक कर बैठा है इस इंतजार में कि कभी तो यह शोर सन्नाटे में दफन हो गा इस लहजे में बयां करता है वह… Continue reading *

Song

तकनीक चाहे कितनी ही विकसित हो जाए ऐसे गाने आज भी उतने ही सार्थक और अानंदप्रद है जब उस जमाने में हुआ करते हैं।।

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That calm and stagnant sea. Look as shallow as deep. Calls everyone to enjoy his waves. Bt won’t be brave and best. To looking deeper and deepest. He always hides his mysterious base. Covered his Storm below the surface. That calm and stagnant sea.

यार

हमप्याला हमनिवाला हो हमदर्द हमराज हो हमसाया हमसफ़र हो यार ऐसा हो तपती धूप में फूलों की डगर सा हो

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एक उम्र के बाद इंसान की पहचान उसकी सूरत नहीं, सीरत बन जाया करती हैं ये दुनिया उसे उसके जज्बों से अपनाया करती हैं खेल के नए पैंतरे उसे आजमाया करती हैं मान ले हार तो भुला देती हैं जीतने वाले को वो सिर पर बिठाया करती हैं।।

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बिना सोचे ही गुजर जाया करते हैं ख़्याल कई कभी नींद सुकून की हो, उन्हें सिरहाने रख के सोएंगे।।