झूठ है ये एक दफा जीना एक बार मरना और एक दफा वफ़ा करना मैने रोज हर आदमी को इक नया किरदार जीते देखा है सौ बार जनम लेते हैं सौ बार मरते देखा है जिंदा चलते लोगों को तिल तिल गुजरते देखा है वफ़ा की क्या बिसात है उसे तो बार बार करते देखा… Continue reading

बबूल

चुभने लगा हूं अब मैं भी कांटों की तरह शायद सीख रहा हूं सार सार सिंचना गहरी हो चली है यक़ीनन, जमीं अब मेरी मैं भी बबूल सा हो रहा हूं जरा जरा।।

मैं

मैं अपने आप में मुक्कमल हूं सारा जहां बसता हैं मुझमें तलाशना है फकत मेरा वजूद मुझे जो मेरे होने और जीने का मक़सद जाहिर कर दे।

एक गृहिणी

आज सुबह से ही थोड़ी हालत खराब थी और हो भी क्यों ना टेंशन भी तो बेहिसाब थी मेरी एग्जाम का सेंटर दूर शहर को आया है वहा जाना मेरे घर वालों को ना भाया है ऐसा भी नहीं था कि मैं डरती हूं ना ही मैं कोई नादान बच्ची हूं पर उन्हें मेरा अकेले… Continue reading एक गृहिणी

उसने सिखाया मुझे मत जाओ उनके पीछे जिन्हे कद्र नहीं तुम्हारे वजूद की वो रास्ते चुनों जहां दिलोदिमाग एक साथ मंजूरी दे दे कशमकश में कभी बड़े फैसले ना लो खुद के लिए जमा करना बेकार है,काम वहीं आएगा जो दूसरों को दिया है बहती नदियां और प्रवाह मय जीवन ही सार्थक है। ये वो… Continue reading

पुनः स्मरण

गिराया जब किसी ने तो ,अपनी औकात याद आई जरूरत हमें नहीं ,उसे थी सहारे की ये बात याद आई मैं तो समंदर की लहरों से खेलती एक कश्ती सी हूँ वो लंगर की रस्सी सा,उसे किनारे की रेत ही भायी बेड़ियों में बाँध के ,भूल बैठी वजूद अपना टुटा जो भ्रम मेरा तो बिसरी… Continue reading पुनः स्मरण

शांति तो मौत लाती है ,ये जिंदगी ही तो है जो शोर मचाती है,खुली आँखों से रंग बिरंगे ख्वाब दिखाती है कभी रूलाती है कभी गुदगुदाती है मुफ़लिसी में शोहरत के अरमान जगाती है गर मिल जाये सब तो जल्द उकता भी जाती है झूठे दिलासे देखकर रिझाती है लालसा के शिकंजे में कैद करके… Continue reading