एक खयाल

दर्द भी मुस्कुराएगा मेरे आगोश मे आकर कि… उसे जाना कहाँ था और वो ठहरा कहाँ आकर कि ऐसा दौर आएगा खुशियों का जहाँ बनकर मैं मदमस्त हो जाऊँगा कुछ खोकर,कुछ पा कर॥ Advertisements

अभिनय

कितने किरदार हम रोज निभाते है? चेहरे पर डालकर मुस्कान का मुखौटा अन्तर्मन के भावों से द्वन्द्व करके छुपा देते है सत्य को मानवीय स्वच्छन्दता को कर पराजित विजित करते है अभिनेता का खिताब न जाने,, कितने किरदार हम रोज निभाते है? झुठ-मुठ के खुश होते है,, झुठ-मुठ के रुठ जाते है,, भावनाओं के खेल… Continue reading अभिनय

जो जैसा है, उसे वैसे ही देखना जो कहा गया,उसे वैसा ही सुनना,समझना बिना अक़्ल लगाये,बिना पूर्वाग्रह के किसी विचार व वचन को उसके मूलरूप में स्वीकार करना कितना मुश्किल है हूबहू वैसे ही जैसे- किसी टेढ़ी दुनिया में सीधी चाल चलना॥

यूँ ही

प्रीत की रीत है बडी़ अनोखी,समझ सके कुछ कोई जो समझा उस नासमझ-सा ,बिरला और न कोय॥

चाय पानी

जियों और जीने दो अब ये मंत्र पुराना है खाओ और खाने दो अब ये नया जमाना है जो शामिल ना हो इस तंत्र में,, और करें प्रतिकार साम,दाम,और दंड ,भेद से,, या कोई हो औजार मकड़जाल से व्यूहतंत्र में उसे फँसाना है खाओ और खाने दो अब ये नया जमाना है बहाने इसमें नये-नये… Continue reading चाय पानी

मैं जिंदा हूँ

हाँ मैं भी असर रखता हूँ हर सही और गलत हरकत की खबर रखता हूँ सोया पडा हूँ तेरे जहन में इक आवाज़ लगाकर तो देख रोकता हूँ तुझे ,टोकता हूँ तुझे जब तू ईमानदारी को शर्मसार करता है गैरकानूनी ढंग से जब तू अपनी जेब भरता है कचोटता हूँ भीतर ही भीतर पर तू… Continue reading मैं जिंदा हूँ

वक्त

दिन पर दिन ढलता गया और वक्त गुजरता गया ये उम्र कटती रही न जाने  किस बहाने से  कभी खुशियों के आने से  कभी खुशियों के जाने से  और कभी गम का साथ निभाने से कभी रूठे को मनाने से  कभी अपनों से रूठ जाने से कभी उडने के ख्वाब देखे कभी डूब जाने की… Continue reading वक्त