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✍ ✍ ✍ मैं शक्ति हूँ, मैं सृष्टि हूँ… मैं ही पुत्र हूँ,मैं ही पिता। मैं ही बेटी हूँ,मैं ही माता। मैं ही व्यष्टि हूँ, मैं ही समष्टी। मैं ही प्रकृति हूँ, मैं ही सृष्टि। मैं शक्ति हूँ, मैं सृष्टि हूँ… मैं ही शक्ति हूँ,मैं ही दिव्या। मैं ही प्रीत हूँ,मैं ही भक्ति। मैं ही… Continue reading ✍️✍️✍️

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यदि कोई ईर्ष्या करे और फिर भी आपकी नकल और अनुसरण करें तो उससे बेहतर आप का कोई प्रशंसक नहीं हो सकता।।

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ये हक़ीक़त भी ख़्वाब सी लगती हैं जब दिलोदिमाग से परे होने लगता है कुछ अनोखा सा अनदेखा सा कुछ जाना पहचाना सा खुशियां जैसे बिखरे हुए आफताब सी लगती हैं किसी ख़ास के होने का एहसास ही काफ़ी है रोम रोम ख़िल जाता हैं हसरतें मेरी रुबाब सी लगती हैं जरूरत ही नहीं होती… Continue reading **

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चाह भी है,राह भी है। गीत भी है,संगीत भी है। प्रीत की विरली फ़िज़ा में, खुशी भी है,नसीब भी है।

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आंखों में चाहे सपने बड़े हों हंसने हंसाने के बहाने छोटे होने चाहिए।।

वर्किंग वुमन

‘वर्किंग वुमन’शब्द को मैंने इतनी बार सुन लिया कि इसे सुनते ही बहुत सारे विचार जहन में आ जाते हैं तो सोचा, क्यों ना आज इसे क्रमबद्ध कर लिख दिया जाए। यह शब्द क्यों प्रचलन में आया? ये मेरे लिए हमेशा जिज्ञासा का विषय रहा है और मन में बहुत सारे प्रश्न भी हैं; जैसे… Continue reading वर्किंग वुमन

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आंखें बंद कर और सोच जरा कि मैं हूं तुम हो और तन्हाई है फिर बता क्या जरूरी है? तेरा मेरा होना, कुछ कम, कुछ ज्यादा होना या यूं ही रुसवाई है गहरी सांस लें और अब बता सब कुछ है पास तेरे फिर कमी क्या है? लबों पे खिली मुस्कान है पर इन आंखों… Continue reading **